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Saturday, October 7, 2023

AAP सांसद राघव चड्ढा को बड़ा झटका, छिन सकता है उनका टाइप 7 बंगला, जानें पूरा मामला

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा को लुटियंस दिल्ली में मौजूद टाइप-7 बंगला अब छोड़ना पड़ सकता है। उन्हें इस सरकारी आवास से बेदखल किए जाने पर अदालत ने अप्रैल में जो रोक लगाई थी, उसे गुरुवार को हटा लिया गया। अदालत ने कहा कि आवास वादी (राघव चड्ढा) को आवंटित एक विशेषाधिकार मात्र है जो उसे एक संसद के सदस्य के रूप में दिया गया है। विशेषाधिकार वापस लेने और आवंटन रद्द होने के बाद उस पर कब्जा जारी रखने का उसे कोई निहित अधिकार नहीं है।एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज सुधांशु कौशिक ने अपने 18 अप्रैल के आदेश पर पुनर्विचार से जुड़ी राज्यसभा सचिवालय की मांग को मंजूर कर लिया और अपने आदेश को वापस ले लिया। अदालत ने कहा कि वादी (आप नेता) मामले में तत्काल राहत के लिए कारण बता पाने में विफल रहा है। आवंटन 3 मार्च 2023 को रद्द कर दिया गया था, जबकि मुकदमा 17 अप्रैल को दायर किया गया। अदालत ने कहा कि राघव चड्ढा को आवंटित बंगला पब्लिक प्रीमाइसिस में आता है। आप नेता की इस दलील को ठुकरा दिया गया कि आवंटन रद्द करने से पहले उन्हें सुनवाई का मौका नहीं मिला था। एडीजे ने कहा कि मामले में कानूनन ऐसा कोई नोटिस देने की जरूरत नहीं थी। चूंकि, मौजूदा वाद में अर्जेंट या तत्काल राहत प्रदान करने की कोई जरूरत नहीं थी, इसीलिए इसे सीपीसी की धारा 80(1) के अनुपालन के लिए लौटाया जा रहा है।

क्या है मामला?

राज्यसभा सचिवालय ने जिस आदेश को वापस लेने का अदालत से अनुरोध किया उसके जरिए आप सांसद को उनके केस के लंबित रहने तक लुटियंस दिल्ली में टाइप -7 बंगले में बने रहने की फौरी राहत दी गई थी। यह बंगला आमतौर पर पूर्व मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों या राज्यपालों को आवंटित किया जाता है। सांसद ने बंगले का आवंटन रद्द करने से जुड़े राज्यसभा सचिवालय के 3 मार्च, 2023 के आदेश को चुनौती दी है, जिस पर नोटिस जारी करते हुए उन्हें यह अंतरिम राहत दी गई थी। अदालत को अपने पिछले आदेश में कमी नजर आने के साथ उसमें सुधार की जरूरत महसूस हुई। चड्ढा को पिछले साल 6 जुलाई को पंडारा पार्क में 'टाइप 6' बंगला आवंटित किया गया था, लेकिन उन्होंने 29 अगस्त को राज्यसभा के सभापति को 'टाइप 7' आवास के लिए अनुरोध किया। इसके बाद उन्हें राज्यसभा पूल से पंडारा रोड पर एक और बंगला आवंटित किया गया था। हालांकि, इस साल मार्च में आवंटन रद्द कर दिया गया है। आप सांसद ने बंगले से बेदखल किए जाने पर रोक के साथ उन्हें मानसिक पीड़ा और प्रताड़ना देने के लिए सचिवालय से 5.5 लाख रुपये हर्जाने की भी मांग की है।

AAP सांसद राघव चड्ढा का पक्ष जानिए

राघव चड्ढा ने कहा, 'सबसे पहले मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि नियमानुसार मुझे आवंटित किए गए आधिकारिक आवास को बिना किसी सूचना के रद्द किया गया है, जो मनमाने रवैये को दर्शाता है। राज्यसभा के 70 से अधिक वर्षों के इतिहास में यह अप्रत्याशित घटना है कि एक मौजूदा राज्यसभा सदस्य को उसके आवंटित आवास से बेदखल करने की कोशिश की जा रही है, जहां वो पिछले कुछ समय से रह रहा है और बतौर राज्यसभा सदस्य उसका कार्यकाल 4 साल से अधिक अभी भी बाकी है। उक्त जारी आदेश में कई अनियमितताएं भी हैं।'

'नियमों का उल्लंघन किया गया'

उन्होंने कहा, 'राज्यसभा सचिवालय द्वारा नियमों व विनियमों का साफ तौर से उल्लंघन करते हुए ये कार्रवाई की गई है। इस पूरी कवायद के तरीके को देखकर मुझे ये मानने के लिए विवश होना पड़ रहा है कि ये सब भाजपा के आदेश पर अपने राजनीतिक उद्देश्यों और निजी स्वार्थों के लिए किया गया है, ताकि मेरे जैसे मुखर सांसदों द्वारा उठाई जा रही राजनीतिक आलोचना को दबाया जा सके।' उन्होंने कहा,'मेरे कई पड़ोसी पहली बार सांसद बने हैं, जिनमें श्री सुधांशु त्रिवेदी, श्री दानिश अली, श्री राकेश सिन्हा और सुश्री रूपा गांगुली शामिल हैं। इन्हें भी इनकी पात्रता से ऊपर वाले आवास आवंटित है। मुझे भी इनके समकझ का ही आवास आवंटित किया गया। दिलचस्प बात यह है कि 240 में से लगभग 118 राज्यसभा सदस्य अपनी पात्रता से उच्चे श्रेणी के आवास में रह रहे हैं। लेकिन भाजपा से सवाल पूछने वाले और स्वस्थ लोकतंत्र को बनाए रखने वाले मुखर सांसदों को चुनिंदा तरीके से निशाना बनाना जा रहा है। मेरे मामले में भी ऐसा ही हुआ और यह एक चिंताजनक स्थिति है।'


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