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Tuesday, November 8, 2022

क्या 20 फीट लंबा कोई हिममानव आज भी हिमालय में घूम रहा है?

नई दिल्ली: वह हिमालय की कंदराओं (गुफाओं) में अकेला घूमता है। ना किसी का डर, ना कोई फिक्र। सफेद रंग, बड़े बाल, इंसान की तरह दिखने वाला आखिर वो महामानव कौन है? उसे कुछ लोग येति या हिममानव कहते हैं। क्या कोई 20 फीट लंबा इंसान या जानवर हिमालय में आज भी रह रहा है? जब भी हिमालय के रहस्य की चर्चा होती है, इस हिममानव का भी जिक्र होता है। कोरोना फैलने से ठीक पहले भारतीय सेना की एक पर्वतारोही टीम ने दावा किया था कि उसने 32x15 इंच के पैरों के निशान देखे हैं। इतने विशाल पैर किसी इंसान के तो नहीं हो सकते हैं।सेना की टीम माउंट मकालू पर पर्वतारोहण अभियान के लिए गई थी। माना जाता है कि यह विशालकाय हिममानव नेपाल और तिब्बत के हिमालयी रेंज में रहता है। पिछले करीब 100 साल से इस रहस्यमय जीव को लेकर बहस होती रही है। क्या सच में ऐसा कोई जीव है या सिर्फ कोरी कल्पना है? 1921 में पहली बार जिक्र आया येति शब्द नेपाली शब्दकोष से निकला है। तिब्बती लोककथाओं में इसे मेह-तेह कहा जाता है। लोग मानते हैं कि येति दो पैरों वाला सफेद रंग का बंदर जैसा दिखने वाला जीव है, जो 10 से 20 फीट लंबा हो सकता है। पहली बार येति के बारे में 1921 में ब्रिटिश एक्सप्लोरर चार्ल्स हावर्ड-बरी ने दावा किया था कि हिमालय की चढ़ाई के दौरान उन्होंने लखपा ला पास के करीब येति के पैरों के निशान मिले हैं। उन्होंने माउंट एवरेस्ट पर लिखी अपनी किताब में इसका जिक्र किया। बरी ने कहा कि यह इंसान की तरह चलने वाले किसी जानवर के पैरों के निशान हो सकते हैं। बाद में उन्होंने स्थानीय लोगों से बातकर ऐसे जंगली, शरीर पर बड़े बाल वाले जीव के बारे में जानकारी जुटाई जो पहाड़ पर दुर्लभ स्थानों पर रहता है। फिर आई तस्वीर 1951 में हिमालय की चढ़ाई करने वाले जानेमाने अंग्रेज एरिक शिप्टन ने येति के पीछे छूटे पैरों के निशान अपने कैमरे में कैद किए। 1960 में सर एडमंड हिलेरी ने अलग दावा किया। 2010 में चीनी हंटर्स ने एक ऐसे बिना बालों और चार पैरों वाले जानवर के बारे में पता लगाया, जिसके शरीर के बाल बीमारी के कारण गिर गए थे। 2011 में शोधकर्ताओं ने दावा किया कि उन्हें येति की अंगुली मिली है लेकिन डीएनए टेस्ट से पता चला कि यह किसी इंसान का है। नेशनल ज्योग्राफिक चैनल हिमालय में येति पर एक डॉक्यूमेंट्री भी बना चुका है। भले ही कोई सबूत न हो, लेकिन येति लोककथाओं और कार्टून में काफी लोकप्रिय है। भालू+बंदर+इंसान = येति वैसे, हिममानव की कल्पना आप आसानी से कर सकते हैं। अगर आपके सामने आ भी जाए तो उसे पहचान सकते हैं। जी हां, बहुत सी फिल्मों में इसे अलग-अलग तरह से दिखाया गया है। वास्तव में येति को अगर कुछ समय के लिए सच मान लें तो यह इंसान, भालू और बंदर का मिला जुला रूप दिखाई दे सकता है। इसके बड़े पैर ही नहीं, बड़े डरावने दांत होने की भी कल्पना की जाती है। पिछले कई दशकों से येति को सही साबित करने और उसे झुठलाने की कोशिशें हुई हैं। हालांकि वैज्ञानिकों का मानना है कि येति वास्तव में एक कल्पना है। हिमालय के येति की तरह पश्चिमी देशों में बिग फुट जैसे विशालकाय बंदर-मानव के किस्से मौजूद हैं। पहाड़ों पर रहने वाले येति को लेकर कई किस्से सुनाते हैं। नेपाल में 12 से ज्यादा किस्सों में येति का जिक्र आता है। नेपाल में प्रचलित एक कथा के मुताबिक येति को सूरज चढ़ने के साथ-साथ विशाल और बलवान होने वाला जीव बताया गया है। उसे देखने वाले इंसान घबराकर अपनी ताकत खो बैठते हैं और बेहोश हो जाते हैं। ऐसे किस्सों से लोग अपने बच्चों को नैतिकता का पाठ पढ़ाते हैं।
  • गोरिल्ला के पैरों का औसत साइज : 10-14 इंच
  • येति के पैरों के निशान : 32 इंच
  • इंसानों में सबसे लंबे पैरों का साइज : 15.78 इंच
पश्चिम से सैलानी येति देखने आने लगे बताते हैं कि जब पश्चिमी देशों के लोग हिमालय की सैर को जाने लगे तो लोककथाओं का किरदार येति और बड़ा होता गया। 1950 का दशक आते-आते बहुत से पश्चिमी देशों के सैलानी हिमालय में येति देखने की उम्मीद में आने लगे। बताते हैं हॉलीवुड स्टार जेम्स स्टीवर्ट ने तो येति की एक अंगुली पाने का दावा भी किया था, पर वह इंसान की अंगुली निकली। कुछ लोगों ने येति की खोपड़ी पाने का दावा किया है। किसी को बाल तो किसी को हड्डियों के टुकड़े मिले जो येति का बताया गया लेकिन टेस्ट वे भालू या हिरण के पाए गए। येति है या नहीं, पता नहीं लेकिन लोगों का यकीन घटा नहीं और बढ़ता चला गया। हॉलीवुड में ही नहीं, भारत में भी रामसे प्रदर्स ने 1991 में कुदरत का अजूबा फिल्म में येति का किरदार दिखाया था। बंगाली कॉमिक सीरीज में येति का चित्रांकन किया गया है। 2017 में फिल्म येति ओभिजान भी बनी थी। अमेरिका के कई रिसर्चरों का कहना है कि अगर मान भी लिया जाए कि येति जैसे जीव छिपकर रह रहे हैं तो उनके आसपास के इंसानों को वे दिखने तो चाहिए। सबसे बड़ी बात ये कि उन्हें खाने-पीने के लिए बाहर तो निकलना ही होगा। ऐसे में वे छिपकर कैसे रह सकते हैं? दूसरी बड़ी बात, अगर वे इंसान और बंदर का मिलाजुला रूप हैं तो प्रचंड सर्दी में जीवित रह पाना उनके लिए आसान नहीं होगा। आखिर में एक्सपर्ट भी यही कहकर रुक जाते हैं कि कोई भालू समझे या इंसान या फिर बंदर जब तक किस्से रहेंगे, हिममानव जिंदा रहेगा।


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